महू तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रहे आलू पपड़ी और चिप्स के कारखाने एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। कोदरिया, चोडलिया, आशापुरा और पातालपानी क्षेत्र में चल रहे कई कारखानों में अवैध लकड़ी का उपयोग कर आलू चिप्स पपड़ी तैयार की जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन कारखानों में नियमों की अनदेखी करते हुए बड़े पैमाने पर जंगलों से लाई गई लकड़ी जलाकर उत्पादन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार कारखानों से निकलने वाला दूषित और बदबूदार पानी खुले में नालियों और आसपास के नालों में छोड़ा जा रहा है। इस पानी में सफेद झाग और तेज दुर्गंध होने से आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगह यह पानी खेतों और जल स्रोतों तक पहुंच रहा है, जिससे जल जीवों और पर्यावरण के लिए भी खतरा पैदा हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को शिकायत की जा चुकी है। कुछ समय पहले प्रशासनिक टीम ने इन कारखानों की जांच भी की थी और कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश कारखाने खुलेआम संचालित हो रहे हैं। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यदि समय रहते इन अवैध कारखानों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान और अधिक बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध लकड़ी के उपयोग और प्रदूषित पानी छोड़ने वाले कारखानों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि क्षेत्र में पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।




