महू।
महू तहसील क्षेत्र में संचालित आलू पपड़ी और आलू चिप्स बनाने वाले कारखानों से निकल रहा दूषित पानी अब पर्यावरण और स्थानीय लोगों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। इन कारखानों से निकलने वाला बदबूदार और सफेद झाग वाला पानी सीधे नालियों और नालों में छोड़ा जा रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में गंदगी और प्रदूषण तेजी से फैल रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इन कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट जल में तेज बदबू आती है और पानी में सफेद झाग साफ दिखाई देता है। यह पानी नालियों के माध्यम से आगे जाकर छोटे नालों और जल स्रोतों में मिल रहा है, जिससे जल जीवों के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी के कारण आसपास के वातावरण में दुर्गंध बनी रहती है और इससे स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका है।
क्षेत्र के कई ग्रामीणों और रहवासियों ने बताया कि फैक्टरियों से निकलने वाले पानी में रसायन और खाद्य अपशिष्ट की मात्रा अधिक होती है, जिसे बिना किसी उपचार के सीधे बहा दिया जाता है। इससे नालियों में झाग जमा हो जाता है और पानी का रंग भी बदल जाता है। कई जगहों पर यह गंदा पानी खेतों और खुले स्थानों तक पहुंच रहा है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले प्रशासन द्वारा इन कारखानों की जांच भी की गई थी और उन्हें नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कई कारखाने अब भी बिना किसी प्रभावी शोधन व्यवस्था के अपशिष्ट जल को खुले में छोड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद फैक्टरियां धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं और प्रदूषण पर कोई ठोस नियंत्रण दिखाई नहीं दे रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का दूषित पानी लंबे समय तक जल स्रोतों में जाने से जल जीवों के लिए घातक साबित हो सकता है। साथ ही इससे भूजल और आसपास के पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे कारखानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें अपशिष्ट जल के उचित शोधन की व्यवस्था करने के लिए बाध्य किया जाए, ताकि क्षेत्र में फैल रहे प्रदूषण को रोका जा सके।




