रोगी कल्याण समिति की बैठक में डॉक्टरों की कमी, बंद ICU-NICU, सर्जरी, शाम की ओपीडी और रेफरल की गंभीर समस्याओं पर नहीं हुई चर्चा; मरीजों को अब भी इंदौर भेजने की मजबूरी।
महू। तहसील कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित रोगी कल्याण समिति की बैठक एक बार फिर मरीजों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। स्थानीय विधायक, एसडीएम, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और चिकित्सक मौजूद रहे, लेकिन बैठक में अस्पताल की सबसे गंभीर समस्याओं पर चर्चा तक नहीं हुई। नतीजा यह रहा कि वर्षों से चली आ रही अव्यवस्थाएं जस की तस बनी हुई हैं।
बैठक में केवल चिकित्सकों को आपसी समन्वय से काम करने और आपसी विवादों से दूर रहने की नसीहत दी गई। साथ ही कहा गया कि जिन मरीजों का इलाज स्थानीय स्तर पर संभव नहीं हो, उन्हें एमवाय, सुपर स्पेशलिटी और अन्य सरकारी अस्पतालों में रेफर किया जाए। लेकिन सवाल यह है कि आखिर महू का सबसे बड़ा शासकीय अस्पताल कब तक केवल रेफरल सेंटर बनकर रहेगा?
तीन साल से ICU-NICU बंद, विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली
मध्यभारत अस्पताल में पिछले तीन वर्षों से ICU और NICU बंद पड़े हैं, लेकिन इन्हें शुरू कराने को लेकर बैठक में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। अस्पताल में एमडी मेडिसिन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ सहित कई अहम पद लंबे समय से रिक्त हैं। महू और मानपुर दोनों अस्पतालों में न्यूट्रिशन रिहेबिलिटेशन सेंटर (NRC) संचालित हैं, लेकिन दोनों जगह बच्चों के इलाज के लिए शिशु रोग विशेषज्ञ तक उपलब्ध नहीं हैं।
क्लास-1 सर्जन मौजूद, फिर भी एक भी सर्जरी नहीं
मध्यभारत अस्पताल में क्लास-1 सर्जन की नियुक्ति होने के बावजूद आज तक सामान्य सर्जरी शुरू नहीं हो सकी। छोटे-छोटे ऑपरेशन और दुर्घटना में घायल मरीजों को भी प्राथमिक उपचार के बाद सीधे इंदौर रेफर कर दिया जाता है। शाम की ओपीडी में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपस्थिति लगातार सवाल खड़े कर रही है। वर्षों से सर्जरी शुरू कराने के दावे किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी नहीं बदली।
MLC व्यवस्था पर भी सिर्फ दावे
बैठक में सिमरोल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एमएलसी (MLC) नहीं होने का मुद्दा जरूर उठा और प्रभारी चिकित्सक को नोटिस देने की बात कही गई। लेकिन यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी कई बार आदेश जारी हो चुके हैं, बावजूद इसके व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। विभाग अपने ही आदेशों का पालन कराने में विफल नजर आ रहा है।
बड़े सवाल अब भी अनुत्तरित
अस्पताल में कैंटीन और पार्किंग ठेके की व्यवस्था, विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, शाम की ओपीडी, ICU-NICU संचालन, सर्जरी और लगातार बढ़ते रेफरल जैसे मुद्दे बैठक में हाशिए पर रहे। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रोगी कल्याण समिति की बैठकों में आखिर मरीजों के हितों पर चर्चा कब होगी? और स्वास्थ्य व्यवस्था के सुधार के दावे जमीनी हकीकत में कब बदलेंगे?




