डेफोडील स्कूल में पहली के छात्र से कथित दुर्व्यवहार पर बवाल, समन्वयक पर कार्रवाई की मांग; प्राचार्य बोले— लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार
महू। महू के सिग्नल विहार स्थित डेफोडील स्कूल सोमवार को उस समय विवादों के केंद्र में आ गया, जब कक्षा पहली के एक छात्र के साथ कथित मानसिक प्रताड़ना के आरोप को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने स्कूल परिसर में जमकर हंगामा किया। कार्यकर्ताओं ने धरने पर बैठकर स्कूल की समन्वयक जैनब खान के खिलाफ कार्रवाई और इस्तीफे की मांग की।
छात्र अर्नव सेंधव की मां मीनू सेंधव ने आरोप लगाया कि स्कूल की समन्वयक जैनब खान उनके बेटे को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं। उनके अनुसार बच्चा पिछले चार दिनों से रोते हुए घर लौट रहा है। जब उन्होंने इस संबंध में समन्वयक से बात की तो उनके साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। उनका आरोप है कि समन्वयक ने कहा, “अब स्कूल में या तो बच्चा रहेगा, या मैं।”
परिजनों का यह भी कहना है कि अर्नव पढ़ाई में हमेशा 96 से 98 प्रतिशत अंक लाता रहा है, लेकिन हाल ही में हुए टेस्ट में उसे शून्य अंक दे दिए गए, जिससे उन्होंने भेदभाव की आशंका जताई है।
मामले की जानकारी मिलते ही एबीवीपी कार्यकर्ता स्कूल पहुंचे और नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। कार्यकर्ताओं ने छात्र के साथ कथित भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए समन्वयक के इस्तीफे की मांग की। हंगामे के दौरान समन्वयक जैनब खान स्कूल परिसर से चली गईं।
जनपद अध्यक्ष को भी बाहर निकाला
धरने के दौरान जनपद अध्यक्ष सरदार मालवीय भी स्कूल पहुंचे और स्कूल प्रबंधन का पक्ष रखने का प्रयास किया। इससे एबीवीपी कार्यकर्ता नाराज हो गए। कार्यकर्ताओं ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें स्कूल परिसर से बाहर कर दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि “स्कूल में राजनीति नहीं चलेगी और इस मामले में किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
प्राचार्य बोले— आरोप बेबुनियाद, स्कूल में ऐसा व्यवहार नहीं होता
वहीं, इस पूरे मामले पर स्कूल के प्राचार्य ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि स्कूल में किसी भी छात्र के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि छात्र के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप झूठे और निराधार हैं। प्राचार्य के अनुसार स्कूल हमेशा विद्यार्थियों के हित और अनुशासन को प्राथमिकता देता है तथा किसी भी छात्र के साथ भेदभाव का सवाल ही नहीं उठता।
फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। यदि मामले की जांच होती है तो उसके बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं एबीवीपी ने छात्र को न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।




