Thursday, September 10, 2026

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सरपंच पर सवाल उठाए तो भाजपा नेता पर गिरी गाज! जावेद पटेल संगठन से निष्कासित

जाकुखेड़ी पंचायत का मामला: विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं के मुद्दे उठाने वाले अल्पसंख्यक मोर्चा जिला प्रभारी जावेद पटेल निष्कासित; पत्र में कार्रवाई का कारण स्पष्ट नहीं

महू। जाकुखेड़ी पंचायत में विकास कार्यों से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाने वाले भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला प्रभारी जावेद पटेल को संगठन से निष्कासित किए जाने की जानकारी सामने आई है। संगठन ने उन्हें पद के साथ भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से भी हटाया है। हालांकि, निष्कासन पत्र में कार्रवाई का स्पष्ट कारण दर्ज नहीं है। इससे पटेल के सवाल उठाने और संगठनात्मक कार्रवाई के बीच संबंध को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई विधायक उषा ठाकुर की अनुशंसा पर जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा के निर्देशानुसार भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष मंसूर अली पटेल द्वारा की गई।

निष्कासन पत्र में कारण का उल्लेख नहीं

जावेद पटेल को जारी निष्कासन पत्र में उन्हें पद और भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से हटाए जाने की जानकारी दी गई है, लेकिन कार्रवाई का आधार या कारण स्पष्ट नहीं किया गया। पत्र में यह उल्लेख नहीं है कि निष्कासन पंचायत से जुड़े मुद्दों पर उनके बयानों के कारण हुआ या किसी अन्य संगठनात्मक वजह से।

इस कारण यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि पटेल द्वारा जाकुखेड़ी पंचायत में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाना ही कार्रवाई का कारण था।

संगठन ने बताया- कई बार दी थी समझाइश

इस संबंध में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा जिला अध्यक्ष मंसूर अली पटेल से बात की गई। उन्होंने बताया कि जावेद पटेल कथित तौर पर कई संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल थे। उनके अनुसार, इस संबंध में पटेल को कई बार मौखिक और लिखित रूप से समझाइश दी गई तथा चेतावनी भी दी गई, लेकिन इसके बावजूद वह संगठन की बात नहीं मान रहे थे।

मंसूर अली पटेल के अनुसार, इसके बाद विधायक उषा ठाकुर की अनुशंसा और जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा के निर्देशानुसार जावेद पटेल के खिलाफ यह संगठनात्मक कार्रवाई की गई।

पंचायत में कथित अनियमितताओं के आरोप, जांच बाकी

जाकुखेड़ी पंचायत के सरपंच पर विकास कार्यों में लागत से अधिक बिल लगाए जाने और शासकीय राशि के संभावित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों को लेकर जावेद पटेल ने सवाल उठाए थे। हालांकि, आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच लंबित है।

किसी जांच या सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष के अभाव में सरपंच या पंचायत से जुड़े किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

अब दो सवालों के जवाब का इंतजार

पूरे मामले में फिलहाल दो अलग-अलग सवाल सामने हैं। पहला, जाकुखेड़ी पंचायत में लगाए गए कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच होगी या नहीं। दूसरा, जावेद पटेल के निष्कासन का वास्तविक आधार क्या था, क्योंकि निष्कासन पत्र में उसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

संगठन ने निष्कासन को संगठन विरोधी गतिविधियों से जोड़कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। वहीं, पंचायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में मामले की आगे की तस्वीर संबंधित जांच और सभी पक्षों के आधिकारिक बयानों के बाद ही साफ होगी।

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