Thursday, September 10, 2026

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श्मशान घाट के नाम पर खर्च हो गए हजारों,ग्रामीण आज भी खेतों से ले जा रहे शव

महू विकासखंड के अंबाड़ा पंचायत का मामला; पोर्टल पर श्मशान घाट निर्माण के नाम पर करीब 80 हजार का बिल, ग्रामीण आज भी खेतों के बीच शव ले जाने को मजबूर

महू। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच महू विकासखंड की ग्राम पंचायत अंबाड़ा में श्मशान घाट निर्माण का मामला सवालों के घेरे में है। पंचायत के रिकॉर्ड और पोर्टल पर श्मशान घाट निर्माण का काम दर्ज है, राशि भी खर्च होना बताई गई है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर श्मशान घाट का निर्माण नजर नहीं आता। हालत यह है कि किसी ग्रामीण की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए शव को खेतों के बीच से ले जाना पड़ता है।

मामला सोमवार को अंबाड़ा निवासी स्वर्गीय यासरी लाल सोलंकी के निधन के बाद सामने आया। परिजन जब अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचे तो वहां न तो उचित व्यवस्था मिली और न ही पहुंचने के लिए पक्का रास्ता। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में खेतों के बीच से शव ले जाना और भी मुश्किल हो जाता है।

कागजों में बना श्मशान, मौके पर क्या?

पंचायत दर्पण पोर्टल पर श्मशान घाट निर्माण के नाम पर करीब 80 हजार रुपए का बिल दर्ज होने की बात सामने आई है। रिकॉर्ड में निर्माण जमीन पर दिखाया गया है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार मौके पर स्थिति इसके उलट है। ऐसे में सवाल उठता है कि निर्माण की राशि किस काम में खर्च हुई और निर्माण का सत्यापन किस स्तर पर किया गया?

चार सवाल, जिनका जवाब जरूरी

श्मशान घाट निर्माण का सत्यापन किसने किया? बिना मौके पर जाए बिल कैसे पास हुआ? तकनीकी सहायक, सचिव और सरपंच का सत्यापन कहां है? यदि विधायक निधि से राशि दी गई थी तो उसका उपयोगिता प्रमाण-पत्र किसने जारी किया? और सबसे बड़ा सवाल—श्मशान घाट तक पहुंचने का रास्ता क्यों नहीं बनाया गया?

ग्रामीणों का कहना है कि मामला सिर्फ एक श्मशान घाट का नहीं, बल्कि पंचायतों में विकास कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता पर भी सवाल खड़ा करता है। जन्म से लेकर मृत्यु तक की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना पंचायत की जिम्मेदारी है, लेकिन अंबाड़ा में अंतिम संस्कार के लिए भी ग्रामीणों को खेतों का रास्ता तलाशना पड़ रहा है।

जांच हुई तो खुल सकता है पूरा मामला

ग्रामीणों ने मांग की है कि जिला पंचायत सीईओ इंदौर मामले की जांच कराएं। निर्माण स्थल की वास्तविक स्थिति, पंचायत दर्पण पोर्टल पर दर्ज बिल, मस्टर रोल और जियोटैग फोटो की जांच के साथ जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी तय की जाए। यदि कागजों में काम पूरा दिखाकर राशि खर्च की गई है तो वसूली और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही श्मशान घाट और वहां तक पहुंचने वाले पक्के मार्ग का निर्माण प्राथमिकता से कराया जाए।

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