महू क्षेत्र के केलोद गांव में गहरीकरण कार्य की निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी अवैध खनन का खेल बदस्तूर जारी है। आरोप है कि यहां पोकलेन मशीनों और डंपरों की मदद से बड़े पैमाने पर मुर्रम निकाली जा रही है और लगातार बाहर भेजी जा रही है।
मामले की जानकारी लेने के लिए जब माइनिंग विभाग की अधिकारी स्वाति ठाकुर से संपर्क किया गया, तो उनका जवाब भी सवालों के घेरे में आ गया। उन्होंने कहा, “रोज़-रोज़ आपको जानकारी नहीं दे पाएंगे, आप अपने दूसरे पत्रकार साथियों से पूछ लीजिए।” अधिकारी का यह रवैया विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
वहीं, मौके पर मौजूद पोकलेन मशीन मालिक से जब खनन की अनुमति और संबंधित दस्तावेजों के बारे में पूछा गया, तो वह कोई भी वैध कागजात पेश नहीं कर पाए। इससे यह संदेह और गहरा गया कि पूरा काम बिना अनुमति के चल रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि समय सीमा खत्म होने के बाद आखिर किसकी शह पर यह अवैध खनन जारी है? और जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी क्यों साधे हुए है?
क्या प्रशासन इस मुर्रम माफिया पर शिकंजा कसेगा या फिर सब यूं ही चलता रहेगा?




