महू, मध्य प्रदेश का एक शांत सैन्य शहर, जहां कई प्रतिष्ठित संस्थान देश की रक्षा की नींव मजबूत करते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यहां की शांति पर साया मंडरा रहा था। स्थानीय बाजारों और सैन्य क्षेत्रों के आसपास नशीले पदार्थों की आपूर्ति बढ़ रही थी, जिसका असर वर्तमान में कार्यरत सैनिकों पर भी पड़ रहा था। अनुमान था कि कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जो कैजुअल लेबर के रूप में घुसपैठ करके आर्मी एस्टेब्लिशमेंट के अंदर तक पहुंच बना चुका था। मिलिट्री इंटेलिजेंस और महू पुलिस लंबे समय से इसकी कमर तोड़ने की कोशिश में जुटे थे, लेकिन ठोस सुराग नहीं मिल रहा था हालांकि ड्रग सप्लाई करने वाले कुछ लोगों पर पहले से ही मिलिट्री इंटेलीजेंस की निगरानी थी।
16 अप्रैल 2026 को दोपहर लगभग 5:20 बजे, एक विश्वसनीय मुखबिर ने गुप्त सूचना दी जिसमें उसने बताया सुमित सुरवाड़े नामक युवक वालॉन्ग द्वार के पास इन्फैंट्री स्कूल के बाहर शाम 7:30 बजे अफीम और गांजा की खेप डिलीवर करने वाला था। सूचना की पुष्टि होते ही संयुक्त टीम—मिलिट्री इंटेलिजेंस और महू पुलिस तैनात हो गई।
शाम करीब 8:10 बजे, बाइक नंबर MP 09 AP 3741 सड़क पर दिखी। बीच में सुमित सुरवाड़े बैठा था, साथ में दो अन्य युवक। उन्होंने पहले आसपास रेकी की—चारों तरफ नजर दौड़ाई, जैसे कोई खतरा न हो। फिर, ठीक 8:15 पर वे वालॉन्ग द्वार के पास रुके। बाइक से उतरते ही टीम ने उन्हें घेर लिया। कोई रास्ता बचने का नहीं था।
तलाशी में संदिग्ध अफीम, गांजा और 5 मोबाइल फोन बरामद हुए। आरोपी थे—सुमित सुरवाड़े (20 वर्ष, पिठ रोड निवासी, पुत्र मनोहर), रोहित चौहान (19 वर्ष, पिठ रोड, पुत्र लेफ्ट. सुभाष चौहान) और प्रेम कुमार (19 वर्ष, गाजी की चाल पिठ रोड, पुत्र विनोद)। जांच में खुलासा हुआ कि सुमित और प्रेम पिछले दो साल से स्टेशन मुख्यालय महू में कैजुअल लेबर के रूप में काम कर रहे थे जिससे उनको फौज के सारे तौर तरीके मालूम थे।फोन चेक और सख्त पूछताछ में तीनों टूट गए। उन्होंने कबूल किया कि वे यादव मोहल्ला के कलू उर्फ मुख्य सप्लायर के इशारे पर काम करते हैं, जो सभी सैन्य प्रतिष्ठानों में नशीले पदार्थ बांटता है और बंटवाता है।
फिलहाल तीनों ड्रग तस्करों को पीएस महू की हिरासत में भेज दिया गया है, अब विस्तृत जांच से पूरा नेटवर्क उजागर करने की कोशिश जारी है। यह घटना सैन्य क्षेत्रों में सुरक्षा की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है—कैजुअल लेबर के जरिए घुसपैठ कैसे घातक हो सकती है। महू पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने संकल्प लिया है कि इस रैकेट को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे, ताकि सैन्य प्रतिष्ठान दोबारा सुरक्षित रहें।
मिलिट्री इंटेलीजेंस और पुलिस ने आर्मी एस्टेब्लिशमेंट में ड्रग सप्लाई करने वाले रैकेट का किया पर्दाफाश




