महू। शनिश्चरी अमावस्या के पावन अवसर पर शनि प्राकट्य उत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्वत परिषद महू के अध्यक्ष पंडित कपिल शर्मा (काशी महाराज) ने श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए भगवान शनि महाराज की महिमा का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि दंडाधिपति श्री काल भैरव के अंश अवतार, भगवान शिव के शिष्य एवं भगवान श्रीकृष्ण के परम प्रिय भक्त सूर्यपुत्र छाया नंदन कर्माधिकारी श्री शनि महाराज का प्राकट्य मध्यान काल में हुआ था। शनिदेव न्याय और कर्मफल के देवता माने जाते हैं, जो प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर पंडित कपिल शर्मा द्वारा श्री दशरथकृत शनि स्तोत्र एवं ध्यान मंत्र का पाठ भी किया गया। श्रद्धालुओं ने शनिदेव की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि और शनि दोष से मुक्ति की कामना की। मंदिरों में विशेष पूजन, तेल अर्पण एवं दान-पुण्य के कार्यक्रम आयोजित किए गए।
पंडित शर्मा ने कहा कि शनिश्चरी अमावस्या पर श्रद्धा भाव से की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है और इससे जीवन में आने वाले कष्टों का निवारण होता है।




